नैनीताल – पूर्व सीएम हरीश रावत स्टिंग मामले में हुई सुनवाई

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रिपोर्ट – कान्तापाल/नैनीताल – उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में न्यायमूर्ति शुधांशू धुलिया की एकलपीठ ने अगली सुनवाई 7 जनवरी की तिथि नियत की है।
आज हरीश रावत के अधिवक्ता ने सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनोती दी जिसमे कहा कि मामले में सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नही है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सीबीआई से जवाब देने को कहा है। मामले में 7 जनवरी को अगली सुनवाई के लिए तिथि नियत की है।
आपको बता दे कि मार्च 2016 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया था, जिसके बाद से उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार गिरी और सरकार गिरने के बाद राज्यपाल की संस्तुति से हरीश रावत पर सीबीआई जांच शुरू हुई। सीबीआई हरीश रावत की गिरफ्तारी की तैयारी कर रहा था लेकिन इसी बीच हरीश रावत ने स्टिंग को फर्जी बताते हुए नैनीताल हाई कोर्ट की शरण ली और अपनी गिरफ्तारी पर रोक और सीबीआई जांच को खत्म करने की मांग की थी। मामले की सुनवाई करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट की एकलपीठ ने हरीश रावत को सीबीआई जांच में सहयोग करने के आदेश दिए थे। साथ ही सीबीआई को निर्देश दिए थे कि वो हरीश रावत को गिरफ्तारी न करें। इसके अलावा सीबीआई को आदेश दिए थे कि अगर हरीश रावत की गिरफ्तारी करने की जरूरत पड़ेगी तो सीबीआई गिरफ्तारी से पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ को अवगत कराएगी जिसके बाद से सीबीआई मामले की जांच कर रही थी। साथ ही स्टिंग मामले में मई 2016 की कैबिनेट बैठक में कांग्रेस सरकार ने हरीश रावत पर चल रही सीबीआई जांच को हटाकर जांच एसआईटी से करने का फैसला लिया था जिसको हरक सिंह रावत ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि अगर राज्यपाल किसी मामले में एक बार सीबीआई जांच की संस्तुति दे देते हैं तो उसे हटाया नहीं जा सकता लेकिन राज्य सरकार द्वारा केबिनेट बैठक में हरीश रावत पर चल रही सीबीआई जांच को हटाने की संस्तुति कर दी, जो नियम विरुद्ध है। साथ ही हरक सिंह रावत ने हरीश रावत पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिसके बाद से मामला सीबीआई के पाले में था और सीबीआई मामले में गहनता से विधायकों की खरीद-फरोख्त पर जांच कर रही थी। करीब डेढ़ साल बाद सीबीआई ने जांच पूरी कर न्यायालय को बताया कि वो हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जा रही है।