करनाल – कर्ण नगरी के प्रवेश स्थलों पर महापुरूषों के नाम से निर्माणाधीन भव्य द्वार

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करनाल – करनाल नगर निगम द्वारा शहर के भिन्न-भिन्न प्रवेश स्थलों पर धर्म-संस्कृति तथा महापुरूषों के नाम पर बनाए जा रहे द्वारों से इस शहर का वैभवशाली इतिहास जीवंत होगा। भावी पीढ़ी इनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सत्य, अहिंसा और वीरता के गुणों को आत्मसात कर सकेगी। निर्माणाधीन द्वारों का काम तेजी से हो रहा है, जबकि एक द्वार तो मुकम्मल होने को है, इनके पुर्ण हो जाने से स्मार्ट सिटी के सौंदर्य में चार-चांद लगेंगे।
नगर निगम आयुक्त निशांत कुमार यादव ने रविवार को द्वारों के निर्माण से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया कि शहर की 4 अलग-अलग एंट्री लोकेशन पर विशाल गेट अथवा द्वारों पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि बलड़ी बाईपास पर श्रीमद भगवत गीता के नाम से बड़ा गेट लगभग बनकर तैयार है। करीब 20 फुट उंचे भव्य द्वार पर भगवान श्री कृष्ण के विराट रूप की प्रतिमा स्थापित की गई है, द्वार का नाम भी भगवत गीता के नाम पर है। गीता जिसका विश्वव्यापी महत्व है और अब तो कई वर्षों से देश-विदेश में गीता जयंती के आयोजन भी किए जा रहे हैं। दूसरी ओर गीता में श्री कृष्ण द्वारा विराट रूप में प्रकट होकर युद्ध में मोहग्रस्त हो गए अर्जुन को जो संदेश दिया था, वह केवल इस पावन ग्रंथ की रचना मात्र ही नहीं है, बल्कि उसे ग्रहण कर मनुष्य अच्छा जीवन जीना सीखता है। उन्होंने बताया कि इस द्वार पर करीब 95 लाख रूपये की लागत आएगी।
आयुक्त ने बताया कि करनाल-मेरठ रोड़ पर हाईवे के निकट पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर बनाए जा रहे गेट का कार्य भी प्रगति पर है। द ीनदयाल उपाध्याय एक महान समाज सुधारक थे। वे समावेशित विचारधारा के समर्थक होने के साथ-साथ मजबूत व सशक्त भारत का निर्माण चाहते थे। सौम्य प्रवृत्ति के उपाध्याय चिंतक होने के साथ-साथ राजनीति और साहित्य में भी रूचि रखते थे और उन्होंने अपने जीवन में कई लेख लिखे, जो ख्याति प्राप्त पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। उनके आदर्शवादी जीवन से अभिप्रेरित होकर वर्तमान में उनके नाम पर प्रदेश व देश में कई योजनाएं चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस गेट के कॉलम बनाने का काम पूरा हो चुका है, ऊपर बीम इत्यादि डालकर अगले दो-तीन महीनो में इसे पूरा कर दिया जाएगा।
आयुक्त ने बताया कि तीसरा द्वार शहर के प्रसिद्ध नमस्ते चौक पर राजा कर्ण के नाम से निर्माणाधीन है और इसका भी काफी काम पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि अगले दो-तीन महीनो में यह भी अपनी पुर्णता की ओर होगा। राजा कर्ण महाभारत के मुख्य पात्रो में से एक व पराक्रमी योद्धा थे। कुंती-सूर्य पुत्र कर्ण को दानवीर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि वह प्रतिदिन प्रात: स्नान के बाद सवा मन सोना दीन, दुखियों और जरूरतमंदो को दान करते थे। इसी के चलते उन्होंने अपने कवच-कुंडल भी दान में दे दिए थे और अंतिम समय में बचा मात्र एक सोने का दांत था, उसे भी दान कर दिया था। करनाल और कर्ण का सम्बंध जग जाहिर है। यही कारण है कि महाराजा कर्ण के नाम से वर्तमान में शहर के बीचो-बीच महाभारत कालीन प्राचीन कर्ण ताल को भव्य रूप में विकसित किया गया है। ताल में म्यूजिकल फाउंटेन के अतिरिक्त राजा कर्ण की विशाल प्रतिमा भी स्थापित है, जो दर्शको को अपनी ओर आकर्षित करती है। बाहर से कर्ण नगरी में आने वाले लोग, दर्शनीय कर्ण ताल का भ्रमण अवश्य कर जाते हैं। कर्ण द्वार के निर्माण पर करीब 73 लाख रूपये की राशि खर्च होगी।
उन्होंने बताया कि चौथा द्वार करनाल-इन्द्र्री रोड़ पर नए बस स्टैण्ड़ से कुछ ही दूरी पर निर्माणाधीन है। यह महाप्रभावी श्री घंटाकर्ण द्वार के नाम से बन रहा है। ज्ञात रहे कि गेट के पास ही जैन मुनि के नाम पर एक आराधना मंदिर भी स्थापित है। श्री आत्म मनोहर मुनि, जैन धर्म के उपाध्याय से वाचनाचार्य बने। देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने पंजाब में एक कार्यक्रम के दौरान श्री आत्म मनोहर मुनि को राष्ट्रसंत की उपाधि से अलंकृत किया था। करीब 78 साल तक सात्विक जीवन व्यतीत करने वाले आत्म मनोहर मुनि ने देश के उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र, अहमदाबाद और दूसरे राज्यों का भ्रमण कर जैन धर्म की शिक्षा और उपेदश दिए। वे मुहं ढक तथा सफेद वस्त्र धारण कर पैदल ही सभी जगहों का भ्रमण करते थे। आज देश में उनके लाखो अनुयायी हैं, जो सत्य और अहिंसा के आदर्शों पर चल रहे हैं। आयुक्त के अनुसार इस गेट के निर्माण पर करीब 70 लाख रूपये की लागत आएगी।
उन्होंने बताया कि भव्य गेट धर्म, संस्कृति और इतिहास का अद्भुत संगम होने के साथ-साथ शहर के सौंदर्यकरण में भी इजाफा लेकर आएंगे। नगर निगम की ओर से इन पर अच्छी तरह से रंग-रोगन कर सभी गेटों के नाम से जुड़े महापुरूषों की फाईबर युक्त भव्य प्रतिमाएं भी लगाई जाएंगी। रात्रि के समय रंगीन लाईटों से द्वारों की छटा अलग स्वरूप में दिखाई देगी।